3 Best Motivational Story In Hindi with Moral

Motivational Story in Hindi with Moral: Hello friends, how are you? Today I am sharing the 3 best motivational stories in Hindi with moral. These motivational Hindi stories are very valuable and give very good motivation for success in life. 


आज के इस आर्टिकल मे मै आप के साथ 3 best motivational story in hindi for students success share कर रहा हूँ। ये हिंदी प्रेरणादायक कहानियाँ छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी होगी। ये सभी कहानियों के अंत मे नैतिक शिक्षा दी गयी हैं। जो छात्रों को लोगों और दुनिया को समझने मे बहुत मदद करेगी।


आईये इन motivational story in Hindi with moral को पढ़ते हैं।


3 Best Motivational Story In Hindi with moral

Motivational Story In Hindi with Moral



1. खम्भे ने पकड़ रखा है!


एक समय शराब का एक व्यसनी एक संत के पास गया और विनम्र स्वर में बोला, 'गुरूदेव, मैं इस शराब के व्यसन से बहुत ही दुखी हो गया हूँ। इसकी वजह से मेरा घर बरबाद हो रहा है। मेरे बच्चे भूखे मर रहे हैं, किन्तु मैं शराब के बगैर नही रह पाता! मेरे घर की शांति नष्ट हो गयी है। कृपया आप मुझे कोई सरल उपाय बताएँ, जिससे मैं अपने घर की शांति फिर से पा सकूँ।' गुरूदेव ने कहा, 'जब इस व्यसन से तुमको इतना नुकसान होता है, तो तुम इसे छोड़ क्यों नहीं देते?' व्यक्ति बोला, 'पूज्यश्री, मैं शराब को छोड़ना चाहता हूं, पर यह ही मेरे खून में इस कदर समा गयी है कि मुझे छोड़ने का नाम ही नहीं ले रही है।'


गुरूदेव ने हँस कर कहा, 'कल तुम फिर आना! मैं तुम्हें बता दूँगा कि शराब कैसे छोड़नी है?'


दूसरे दिन निश्चित समय पर वह व्यक्ति महात्मा के पास गया। उसे देख महात्मा झट से खड़े हुए और एक खम्भे को कस कर पकड़ लिया। जब उस व्यक्ति ने महात्मा को इस दशा में देखा, तो कुछ समय तो वह मौन खड़ा रहा, पर जब काफी देर बाद भी महात्माजी ने खम्भे को नहीं छोड़ा, तो उससे रहा नहीं गया और पूछ बैठा, कि 'गुरूदेव, आपने व्यर्थ इस खम्भे को क्यों पकड़ रखा है?' गुरूदेव बोले, 'वत्स! मैंने इस खम्भे को नहीं पकड़ा है, यह खम्भा मेरे शरीर को पकड़े हुए है। मैं चाहता हूँ कि यह मुझे छोड़ दे, किन्तु यह तो मुझे छोड़ ही नहीं रहा है।' उस व्यक्ति को अचम्भा हुआ! व्ह बोला, 'गुरूदेव मैं शराब जरूर पीता हूँ, मगर मूर्ख नहीं हूँ। आपने ही जानबूझ कर इस खम्भे को कस कर पकड़ रखा है। यह तो निर्जिव है, यह आपको क्या पकड़ेगी यदि आप दृढ़-संकल्प कर लें, तो इसी वक्त इसको छोड़ सकते हैं। गुरूदेव बोले, 'नादान मनुष्य, यही बात तो मैं तुम्हें समझाना चाहता हूँ कि जिस तरह मुझे खम्भे ने नहीं बल्कि मैंने ही उसे पकड़ रखा था, उसी तरह इस शराब ने तुम्हें नहीं पकड़ा है, बल्कि सच तो यह है कि तुमने ही शराब को पकड़ रखा है। तुम कह रहे थे कि यह शराब मुझे नहीं छोड़ रही है। जबकि सत्य यह है कि तुम अपने मन में यह दृढ़ निश्चय कर लो कि मुझे इस व्यसन का त्याग अभी कर देना है, तो इसी वक्त तुम्हारी शराब पीने की आदत छूट जायेगी। शरीर की हर क्रिया मन के द्वारा नियंत्रित होती है और और मन में जैसी इच्छा-शक्ति प्रबल होती है, वैसा ही कार्य सफल होता है।' वह शराबी गुरू के इस अमृत-वचनों से इतना प्रभावित हुआ कि उसने उसी वक्त भविष्य में कभी शराब न पीने का दृढ़-संकलप किया। उसके घर में खुशियाँ लौट आयीं और वह शांति से जीवन-यापन करने लगा।


इस तरह हमें शिक्षा मिलती है कि जीवन में कोई भी व्यसन ऐसा नहीं है, जिसे एक बार ग्रहण किये जाने के बाद छोड़ा ना जा सके। अगर मनुष्य चाहे तो बड़ी से बड़ी बुराई का त्याग कर सकता है।



2. तीन चोर


बहुत दिनों की बात है। किसी शहर में रमन, घीसा और राका तीन चोर रहते थे। तीनों को थोड़ा-थोड़ा विद्या का ज्ञान था। तीनों चोरों को विधा का ज्ञान प्राप्त होने के कारण बहुत घमण्ड था। विद्या द्वारा तीनों चोर शहर में बड़े-बड़े लोहे की तिजोरियों को तोड़ देते थे और बैंकों को लूट लिया करते थे। इस तरह तीनों चोरों ने शहर के लोगों की नाक में दम कर रखा था।


एक बार तीनों चोरों ने एक बड़े बैंक में डकैती करके सारा माल उड़ा दिया। तब पुलिस को खबर हुई तो तीनों चोरों को पकड़ने के लिए तलाश करने लगी। मगर तीनों चोर पास ही के एक घने जंगल में भाग गए।


तीनों चोरों ने देखा कि जंगल में बहुत-सी हड्डियां बिखरी पड़ी हैं। रमन ने अनुमान लगाकर कहा- ''ये तो किसी शेर की हड्डियां हैं। मैं चाहूं तो सभी हड्डियों को अपनी विद्या के ज्ञान द्वारा जोड़ सकता हूं।'' घीसा को भी विद्या का घमंड था सो, वह बोला - ''अगर ये शेर की हड्डियां हैं तो मैं इनको अपनी विधा द्वारा शेर की खाल तैयार कर उसमें डाल सकता हूं।'' रमन और घीसा की बात सुनकर राका का भी घमण्ड उमड़ पड़ा और उसने कहा - ''तुम दोनों इतना काम कर सकते हो तो मैं भी अपनी विद्या द्वारा इसमें प्राण डाल सकता हूं।''


तीनों चोर अपनी विद्या का प्रयोग करने लगे। कुछ देर बाद रमन ने सारी हड्डियों को जोड़ दिया और घीसा ने शेर की हुबहू जान जान डाल दी। थोड़ी देर में तीनों चोर सामने एक जीवित भयानक शेर को देखकर थर-थर कांपने लगे। मगर शेर के पेट में तो एक दाना नहीं था। वह भूख के मारे गरजता हुआ तीनों चोरों पर हमला कर बैठा और मारकर खा गया। शेर मस्त होकर घने जंगल की ओर चल दिया।


कहानी से शिक्षा


दोस्तों, इस कहानी से हमें यही शिक्षा मिलती है कि कभी घमण्ड नहीं करना चाहिए। घमण्डी को हमेशा दुख का ही सामना करना पड़ता है। यदि तीनों चोर अपनी विद्या का घमण्ड न करते तो उन्हें जान से हाथ न धोने पड़ते। हमें अपनी विद्या का प्रयोग सोच-समझकर करना चाहिए।



3. मिदास का स्पर्श 


हम सभी लालची राजा मिदास की कहानी जानते हैं। उसके पास साने की कमी नहीं थी, लेकिन सोना जितना बढ़ता, वह और अधिक सोना चाहता। उसने सोने को खज़ाने में जमाकर लिया था, और हर रोज़ उसे गिना करता था।


एक दिन ज बवह सोना गिन रहा था, तो एक अजनबी कहीं से आया और बोला, 'तुम मुझसे ऐसा कोई भी वरदान मांग सकते हो, जो तुम्हें दुनिया में सबसे ज्यादा खुशी दे।' राजा खुश हुआ, और उसने कहा, 'मैं चाहता हूं कि जिस चीज को छुऊँ, वह सोना बन जाए।' अजनबी ने राजा से पूछा, 'क्या तुम सचमुच यही चाहते हो?' राजा ने कहा, ''हाँ'', तो अजनबी बोला, 'कल सूरज की पहली किरण के साथ ही तुम्हें किसी चीज़ को छूकर सोना बना देने की ताक़त मिल जाएगी।'


राजा ने सोचा कि वह सपना देख रहा होगा, यह सच नहीं हो सकता। लेकिन अगले दिन जब राजा नींद से उठा, तो उसने अपना पलंग छुआ, वह सोना बन गया। वह वरदान सच था। राजा ने जिस चीज़ को भी छुआ वह सोना बन गई। राजा ने जिस उसने खिड़की के बाहर देखा, और अपनी नन्हीं बच्ची को खेलते पाया। उसने अपनी बिटिया को यह अजूबा दिखाना चाहा, और सोचा कि वह खुश होगी। लेकिन बगीचे में जाने से पहले उसने किताब पढ़ने की सोची। उसने जैसे ही उसे छुआ, वह सोने की बन गई। वह किताब को पढ़ न सका। फिर वह नाश्ता करने बैठा, जैसे ही उसने फलों और पानी के गिलास को छुआ, वे भी सोने के बन गए। उसकी भूख बढ़ने लगी और वह खुद से बोला, ‘मैं सोने को खा और पी नहीं सकता।' ठीक उसी समय उसकी बेटी दौड़ती हुई वहाँ आई, और उसने उसे बाँहों में भर लिया। वह सोने की मूर्ति बन गई। अब राजा के चेहरे से खुशी गायब हो गई।


राजा सिर पकड़कर रोने लगा। वह वरदान देने वाली अजनबी फिर आया, और उसने राजा से पूछा कि क्या वह हर चीज़ को सोना बना देने की अपनी ताक़त से खुश है? राजा ने बताया वह दुनिया का सबसे दुखी इंसान है। राजा ने उसे सारी बात बताई। अजनबी ने पूछा- 'अब तुम क्या पसंद करोगे, अपना भोजन और प्यारी बिटिया, या सोने के ढेर और बिटिया की सोने की मूर्ति।' राजा ने गिड़गिड़ाकर माफ़ी मांगी, और कहा, 'मैं अपना सारा सोना छोड़ दूंगा, मेहरबानी करके मेरी बेटी मुझे लौटा दो, क्यांकि उसके बिना मेरी हर चीज़ मूल्यहीन हो गई है।' अजनबी ने राजा से कहा, - 'तुम पहले से बुद्धिमान हो गए हो।' और उसने अपने वरदान  को वापिस ले लिया। राजा को अपनी बेटी फिर से मिल गई, और उसे एक एसी सीख मिली जिसे वह जिंदगी-भर नहीं भुला सका।


इस कहानी से क्या शिक्षा मिलती है?


घटिया या विकृत जीवन मूल्यों से दुख ही मिलता है और कई बार इच्छा का पूरा होना, न पूरा होने से बड़ा दुख बन जाता है।



दोस्तों यह थी 3 best Motivational Story in hindi with moral. ये सभी कहानियाँ नैतिक है। और इन कहानियों से बच्चों को बहुत मदद मिलेगी। 


आप को ये best hindi motivational story for success कैसी लगी हमे comment मे जरूर बताएं। अगर आप को ये कहानियाँ अच्छी लगी तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर share करें। 

 

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